मनुष्य का कर्म
मनुष्य का कर्म
कर्म शब्द व्यापक अर्थ को रखता है। कर्म करने से शरीर स्वस्थ रहता है। दुनिया में आए है तो जीना ही पड़ेगा और जीने के लिए रोटी कपड़ा मकान अनिवार्य हैं। और इनकी पूर्ति के लिए कर्म करना अत्यावश्यक है।
सफल तो हर कोई होना चाहता है लेकिन सफलता के लिए कड़ी मेहनत ही एकमात्र विकल्प है यदि आप कड़ी मेहनत करना जानते है तो आपको सफल होने से कोई रोक भी नही सकता है जैसा की धर्म ग्रंथो में भी लिखा गया है मनुष्य जन्म में कर्म हमेसा प्रधान होता है यानी हमे फल ओर परिणाम की चिंता किये बिना अपना कार्य करते रहना चाहिए तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है.
1 – सफलता कोई अकस्मात घटना नही होती है बल्कि यह लगातार अनवरत कठिन कार्यो का परिणाम होता है
2 – सपने किसी जादू से सच नही होते बल्कि यह कठिन मेहनत, अथक प्रयास और दृढ़ संकल्प से सच किये जाते है.
3 – यदि आप कड़ी से कड़ी मेहनत करते है तो आपको सफल होने से कोई रोक नही सकता जिसके लिए दृढ़ आत्मविश्वास की जरूरत होती है.
4 – यदि आप सफल होने के उम्मीद नही छोड़ते है तो आपका कड़ी मेहनत ही आपको एक दिन आपको सफल अवश्य बना देंगा.
5 – यदि आप जो कुछ बनना चाहते है उसका एकमात्र ही विकल्प है कड़ी मेहनत, यदि आप कड़ी मेहनत करना जानते है तो आपके लिए सफलता खुद चलकर आएगा.
6 – यदि आपके अंदर विश्वास है तो यही विश्वास आपको सकरात्मक बना देता है जिसके दम पर आप कड़ी मेहनत से सफलता अवश्य हासिल कर सकते है.
7 – आप चाहे अपने कार्य या ड्यूटी पर हो या अपने परिवार के साथ, जीवन के हर क्षण का आनन्द लेना ही जीवन के सुख का राज है.
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9 – सफलता का कोई रहस्य नही होता, सफलता तो अच्छे से तैयारी, कठिन मेहनत और गलतियों से सीखने का परिणाम होता है.
10 – सपनों को सच करने के लिए सबसे पहले आपको करना क्या है ये समझना होगा फिर आपके दृढ़ विश्वास, कड़ी मेहनत और लक्ष्य के जरिये उसे सच कर सकते है.
11 – दिन तभी अच्छा होता है जब दिन की शुरुआत सकरात्मक सोच के साथ कड़ी मेहनत के साथ शुरू करते है.
12 – जितना आप सुंदर दिखने के लिए करते है उसके बजाय अगर आप कड़ी मेहनत करते है तो आपका जीवन कही और अधिक सुंदर हो सकता है.
13 – बिना मेहनत के कुछ नही मिलता, अगर फिर भी ऐसा सोचते है तो यह आपका भ्रम है.
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15 – यदि आप लगातार कड़ी मेहनत करते है तो यही मेहनत आपको सफलता की तरफ ले जाती है जो की आपको महान बनाती है.
16 – हर या जीत दोनों में से कोई एक तय होता है तो फिर हार के डर से मेहनत या कार्य करना कभी नही छोड़ना चाहिए, क्या पता अगली कोशिश आपकी जीत में बदल जाए.
17 – यदि आप अपने मनपसन्द कार्य को चुनते है तो जीवन रुचिपूर्ण होने लगता है लेकिन यदि यही काम मन मुताबिक नही हो तो जीवन में समय बस काटने जैसा ही रह जाता है.
18 – कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नही होता.
19 – यदि आप मन के पक्के है तो चाहे कितना भी थके क्यू ना होते है लेकिन थकने के बाद भी कड़ी मेहनत करना नही छोड़ते.
20 – बिना अनुशासन और कड़ी मेहनत के सफलता की आशा करना बेमानी है.
21 – अपने सपनों को कभी सीमित न रखे, क्युकी अगर आपके सपने ही न होंगे तो फिर आप कड़ी मेहनत भी नही कर सकते है फिर सफलता तो दूर की बात है.
22 – अगर खुद पर विश्वास रखते है और अपने क्षमता पर भरोसा है तो वो आप हासिल कर सकते हो जिसे आप सोचते हो क्युकी कड़ी मेहनत से कुछ भी असम्भव नही है.
23 – भगवान भी सिर्फ उन्ही लोगो की मदद करता है जो कड़ी मेहनत करना जानते है.
24 – भाग्य किसी एक का हो सकता है लेकिन कड़ी मेहनत से कोई भी सफल बन सकता है.
25 – आपका कार्य आपकी क्षमता को दिखाता है अब यह आप पर निर्भर करता है की लोगो के सामने आप कैसा दिखना चाहते है.
26 – अगर आप पूरी लगन और मेहनत से कार्य करते है तो आपकी बराबरी करने वाला कोई नही होता है.
27 – सभी एक जैसे इस धरती पर पैदा होते है कोई अपनी कड़ी मेहनत के दम पर सफल कहलाता है तो कई लोग बिना कुछ करने से लोगो के सिर्फ उपहास का कारण बनकर रह जाते है.
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29 – यदि कड़ी मेहनत करते है और लोगो के प्रति दयावान बने रहते है तो फिर आपको ऐसी चीजे मिलेगी जिसकी कल्पना भी नही किया होगा.
30 – अपना कार्य खुद से पूरा करने की कोशिश करे, दुसरो के भरोसे कभी भी कोई कार्य जल्दी पूर्ण नही होता है.
जो कार्य जितनी श्रद्धा से किया जायेगा, उतना ही श्रेष्ठ होगा. – महात्मा बुद्ध
जो कर्म यज्ञ के लिए किये जाते हैं, उनके अलावा हुए कर्मों से बंधन उत्पन्न हो जाते हैं. – श्रीकृष्ण
काम करने से पहले सोचना बुद्धिमानी, काम करते हुए सोचना सतर्कता और काम करने के बाद सोचना मूर्खता है. – दयानन्द सरस्वती
कर्म करने पर ही तुम्हारा अधिकार है, फल में नहीं. तुम कर्मफल का कारण मत बनो और अपनी प्रवृति कर्म करने में रखो. – श्रीमद्भागवत गीता
काम करके कुछ उपार्जन करना शर्म की बात नहीं. दूसरों का मुंह ताकना शर्म की बात है. – प्रेमचन्द
कोई भी व्यक्ति किसी कार्य को सर्वोत्तम ढंग से करना चाहता है तो उसे अपनी सम्पूर्ण योग्यता पूरी सामर्थ्य उसमें लगा देनी चाहिए. – स्वेट मार्डेन
कर्म जीवन में आनंद देता है और दुःखो को भूलने का साधन बनता है. – स्वामी रामतीर्थ
जो सिर्फ काम की बात करते हैं, वे अवश्य सफल होते हैं. – डेल कार्नेगी
कर्म दुखो का कारण होते हैं, लेकिन इनके बिना सुख भी नहीं मिलता. – डिजरायली
कर्म के दर्पण में व्यक्तित्व का प्रतिबिंब झलकता है. – विनोबा भावे
कठोर श्रम की इच्छा एवं शक्ति का दूसरा नाम प्रतिभा है. – मैक ऑर्थर
कर्मफल का त्याग ही सच्चा त्याग है. यही मुक्ति है. – भगवान कृष्णा
किया हुआ पुरूषार्थ भाग्य का निर्माण करता है. साक्षात ईश्वर भी पुरूषार्थहीन व्यक्ति को कुछ देने के अधिकारी नही होते. – वेदव्यास
कार्य आरम्भ न करने से उद्देश्य सिद्ध नहीं होता, परन्तु पुरूषार्थ करने से भी जिनके कार्य सिद्ध न हो, वे भाग्य के मारे होते हैं. – वेदव्यास
कर्म के द्वारा मौन रहते हुए चींटी से अच्छा उपदेश कोई दूसरा नहीं देता. – डॉ. राधाकृष्णन
कर्म करने से पहले यह तय कर लेना चाहिए कि उससे पछतावा होगा या प्रसन्नता प्राप्त होगी. – भगवान बुद्ध
कर्मयोगी भाग्य का निर्माण स्वयं करते है. कर्महीन ही भाग्य को कोसते हैं. – अज्ञात
कर्म ही धर्म का दर्शन है. समय-समय पर पुरातन दर्शन की नये संदर्भ में समय के अनुसार बुद्धिमत्तापूर्ण व्याख्या की आवश्यकता होती है. बुद्धिमान व्यक्ति. पैगम्बर और ऋषि, जनसाधारण को पुरातन दर्शन को वर्तमान सन्दर्भ में ही अपनाने का परामर्श देते हैं. – स्वामी विवेकानंद
काम करने वाला मरने से कुछ घंटे पूर्व ही बूढ़ा होता है. – वृन्दावनलाल वर्मा
कर्म से आदमी ऊँचा नीचा होता है. प्रभु सबको उसके कर्मफल से ऊँचा पद व मान मर्यादा देते हैं. – वेद व्यास
क्या हुआ कर्म और बोया हुआ बीज उचित समय लेता ही है. – मनुस्मृति
कर्म की मुक्ति आनन्द में एवं आनन्द की मुक्ति कर्म में है. – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
उत्तम पुरूषों की यह रीति है कि वे किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ते. – गुरू नानकदेव
अच्छे कामों की सिद्धि में बड़ी देर लगती हैं, पर बुरे कामों की सिद्धि में यह बात नहीं होती. – प्रेमचंद
अधूरा काम और अपराजित शत्रु दोनों ही बुझी चिंगारी के समान है. – चाणक्य
इस संसार में वही जीवित है जिसने यश एवं कीर्ति के कर्म किये. – अज्ञात
आत्मा जिस कार्य को करने में सहमत न हो, उस कार्य को करने में शीघ्रता न करो. – मुनि गणेश
इस पृथ्वी पर साधन करने से सभी काम सफल होते हैं. – अज्ञात
अपने से हो सके, वह काम दुसरे से नहीं करवाना चाहिए. – महात्मा गांधी
अपने कार्य को पूरा करो और खरे बनकर पेट भरो. बलवान, क्रियाशील, कर्त्यव्यपरायण, ईमानदार और मेहनती व्यक्तियों को ही जीवन का सर्वोच्च आनंद प्राप्त होता है. – ऋग्वेद
मनुष्य जब असाधारण कार्य कर दिखाता है, वह यश का कारण बन जाता हैं. – कालिदास

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