सकारात्मक
सकारात्मक
1. गलती उसी से होती है, जो मेहनत करता है
निकम्मों की ज़िंदगी तो दूसरों की गलती खोजने में ही खत्म हो जाती है।
2. मेरी गलतियां मुझसे कहो दूसरों से नहीं,
क्योंकि सुधरना मुझे है उनको नहीं..
3. करोड़ों की भीड़ में इतिहास मुट्ठी भर लोग ही बनाते हैं,
वही रचते हैं इतिहास, जो आलोचना से नहीं घबराते हैं...
4. मुलाकात जरूरी है अगर रिश्ते निभाने हों,
वरना लगाकर भूल जाने से पौधे भी सूख जाते हैं।
5. ज़िंदगी के इस रण में खुद ही कृष्ण और खुद ही अर्जुन बनना पड़ता है,
रोज़ अपना ही सारथी बनकर जीवन की महाभारत को लड़ना पड़ता है।
6. दुनिया के दो असंभव काम,
मां की “ममता” और पिता की “क्षमता” का अंदाजा लगा पाना।
7. ज़माना भी अजीब है,
नाकामयाब लोगों का मजाक उड़ाता है ..
और कामयाब लोगों से जलता है।
8. ईश्वर ने हमें धरती पर एक खाली चेक की तरह भेजा है,
गुणों और योग्यताओं के आधार पर हमें स्वयं अपनी कीमत उसमें भरनी होती है।
9. हर पतंग जानती है, अंत में कचरे में ही जाना है,
लेकिन उसके पहले उसे आसमान छू के दिखाना है।
10. हम समझते कम हैं, समझाते ज्यादा हैं,
इसलिए हम सुलझते कम, उलझते ज्यादा हैं।
11. कौन सी बात, कब, कैसे कही जाती है,
ये सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है।
12. फूल कभी दो बार नहीं खिलते,
जन्म कभी दो बार नहीं मिलते,
मिलने को तो हजारों लोग मिल जाते हैं
पर हजारों गलतियां माफ करने वाले
मां-बाप नहीं मिलते।
13. सारा झगड़ा ही ख्वाहिशों का है,
न गम चाहिए, न कम चाहिए।14. किसी के हक की रोटी छीनकर,
खाने से ज्यादा अच्छा है भूखे रहना।
15. जिस घर में बेटियों और बहुओं के
खिलखिलाने की आवाज़ आती है
उस घर में वास्तु दोष कभी नहीं होता है।
16. बेगुनाह कोई नहीं, सबके राज़ होते हैं,
किसी के छुप जाते हैं, किसी के छप जाते हैं..।
17. खुशी से जीने के बहाने ढूंढें,
गम तो किसी भी बहाने मिल जाता है।
18. वो गलतियां बहुत दर्द देती हैं,
जिनकी माफी मांगने का वक्त निकल चुका होता है।
19. निकाल के जिस्म से जो अपनी जान देता है,
बड़ा ही मजबूत है वो पिता जो कन्यादान देता है।
20. हीरे को परखना है तो अंधेरे का इंतज़ार करो
धूप में तो कांच के टुकड़े भी चमकने लगते हैं।
विशेष :- जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे. यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो , तुम कमजोर हो जाओगे,अगर खुद को ताकतवर सोचते हो, तुम ताकतवर हो जाओगे.

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